02 अक्तूबर, 2016

कटुआ...!!!

फ़ैज़ल किसी ज़रूरी काम से दिल्ली गया हुआ था और काम ख़त्म होने पर उसे मुजफ्फरपुर वापस लौटना था। वापसी पर स्लीपर क्लास में टिकट न उपलब्ध होने के कारण फैज़ल ने वैशाली एक्सप्रेस में RAC का टिकट ले लिया। फ़ैज़ल ने स्टेशन पहुंच कर जब रिजर्वेशन चार्ट चेक किया तो पता चला की उसकी सीट AC क्लास में कन्फर्म हो गयी है और साइड वाली सिंगल बर्थ मिली है जिस पर फ़ैज़लवा के साथ एक और व्यक्ति भी सफर करेगा जिसका नाम नीरज मिश्रा (बदला हुआ नाम) है। आम तौर पे RAC वालों को साइड वाली सीट पर दो सवारियों को एडजस्ट कर दिया जाता है। फ़ैज़ल अपना छोटा सा बैग उठाये अपने कोच की और बढ़ गया। फ़ैज़ल जब कोच के अंदर पहुंचा तो नीरज मिश्रा जी पहले से ही सीट पर बैठे हुए थे। फ़ैज़ल ने सीट के नीचे अपना बैग रखा तो मिश्रा जी ने उसे बैठने की जगह दे दी और बगल में बैठे एक व्यक्ति से बात करने लगे। नीरज मिश्रा जी की बातों से पता चला की वह पहले दैनिक भास्कर में पत्रकार थे लेकिन हाल ही में उन्होंने दैनिक जागरण ज्वाइन कर लिया है। नीरज मिश्रा जी निरंतर बगल में बैठे हुए भाई जी से बातें करते रहे और फ़ैज़ल ध्यानपूर्वक मिश्रा जी और बगल में बैठे हुए भाई जी की बातें सुनने लगा। मिश्रा जी और बगल में बैठे हुए भाई जी की बातों से पता चला की दोनों कट्टर मोदी भक्त, और संघी भी हैं। दोनों लगातार समुदाय विशेष के लोगों को गरियाये चले जा रहे थे और बार बार उन्हें कटुआ कहकर संबोधित कर रहे थे। मिश्रा जी कह रहे थे की इन कटुओं ने देश की हालत खराब की हुई है। यह खाते भारत का हैं और गाते पाकिस्तान का हैं। मोदी जी ने भी सत्ता सँभालने के बाद से इन कटुओं के विरुद्ध कोई कठोर कदम नहीं उठाया है। इन साले कटुओं को जब तक देश से बाहर नहीं खदेड़ दिया जाता तब तक देश की हालत नहीं सुधरने वाली है। और भारत में केवल मोदी में ही वो दम है जो इन कटुओं को भारत से खदेड़ सके। दिल्ली से अलीगढ तक तो फ़ैज़ल मिश्रा जी और बगल वाले भाई जी की बातें सुनता रहा फिर उसे नींद आ गयी।
अगली सुबह जब फ़ैज़ल जागा तो कुछ समय के बाद मिश्रा जी और बगल वाले भाई जी फिर बातचीत में व्यस्त हो गए। इस समय उनके बातचीत का विषय दूर नकाब पहने और तीन बच्चों के साथ बैठी हुई एक महिला थी। मिश्रा जी समुदाय विशेष की बढ़ती हुई जनसँख्या को लेकर काफी चिंतित थे और कह रहे थे एक दिन यह स्थिति हो जायेगी की हिन्दू समाज अल्पमत में आ जायेगा और ये कटुए बहुमत में आ जायेंगे और यदि हम अब भी नहीं जागे तो यह कटुए हमें ही हमारे देश से निकाल बाहर करेंगे। फैजल चुपचाप बैठा हुआ उन दोनों की बातें सुनता रहा।
लंबे समय तक बैठे बैठे फ़ैज़ल के पैर में दर्द हो रहा था। जब बीच में कोई स्टेशन आया तो फ़ैज़ल ट्रैन से नीचे उतर कर टहलने लगा। सामने ही एक किताब की दुकान पर नज़र पड़ी तो फ़ैज़ल वहां पर जाकर किताबें देखने लगा। फ़ैज़ल ने किताब वाले से पूछा की आपके पास कोई उर्दू किताब है क्या तो किताब वाले ने कहा कि "हुमा उर्दू डाइजेस्ट" है। फ़ैज़ल ने "हुमा उर्दू डाइजेस्ट" की एक प्रति खरीद ली और अपने सीट पर आ कर बैठ गया और किताब पढ़ने में व्यस्त हो गया। मिश्रा जी और बगल वाले भाई जी के चर्चा का विषय अब भी समुदाय विशेष, संघ, मोदी, भाजपा और कटुआ ही था।
अनायास ही नीरज मिश्रा जी का ध्यान फ़ैज़ल के हाथ में पकडे हुए उर्दू किताब की तरफ में गया तो नीरज मिश्रा जी चौंक गए और उन्होंने ने फ़ैज़ल से पूछा की, "अरे...!!! आप तो उर्दू किताब पढ़ रहे हैं, आपका नाम क्या है...?
फ़ैज़ल ने कहा, "कटुआ...!!!"
फ़ैज़ल का जवाब सुनकर मिश्रा जी और बगल वाले भाई जी के चेहरे का रंग उड़ गया। मानो काटो तो खून नहीं। थोड़ी देर के लिए जैसे वहां पर सन्नाटा छा गया। तभी गाडी मुजफ्फरपुर जंक्शन पर पहुंची और फ़ैज़ल उन दोनों को अवाक अवस्था में छोड़ अपना बैग उठाये बाहर की ओर चल पड़ा।

#आपबीती #सत्यघटना
- Khalid Hussain