23 अगस्त, 2013

आइये जानें ‘इज़राइल’ को

दक्षिण-पश्चिम एशिया का एक स्वतंत्र यहूदी देश है ‘इज़राइल’। इज़राइल शब्द का इब्रानी भाषा में अर्थ होता है - “ऐसा राष्ट्र जो ईश्वर का प्यारा हो”। यह दक्षिण-पूर्व भूमध्य सागर के पूर्वी छोर पर स्थित है। उन्नीसवीं सदी के अंत में तथा फिर बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में यूरोप में यहूदियों के ऊपर किए गए अत्याचार के कारण यूरोपीय (तथा अन्य) यहूदी अपने क्षेत्रों से भाग कर येरुशलम और इसके आसपास के क्षेत्रों में आने लगे। पैलेस्टाइन से ब्रिटिश सत्ता के समाप्त होने पर 14 मई, 1948 ई॰ में आधुनिक इज़राइल राष्ट्र की स्थापना हुई थी। इस बात को आज 65 साल बीत गये। ‘यरुशलम’ इज़राइल की राजधानी है। उसके महत्वपूर्ण शहरों में ‘तेल अवीव’ का नाम आज प्रमुखता से लिया जाता है। यहाँ प्रमुख भाषा इब्रानी (हिब्रू) है, जो दाहिने से बाएँ लिखी जाती है, और यहाँ के निवासियों को ‘इज़रायली’ कहा जाता है।

क्या आप जानते हैं? इज़राइल का कुल क्षेत्रफ़ल 20,700 वर्ग किलोमीटर है जो कि इतना है कि तीन इज़राइल मिलकर भी हमारे उत्तर प्रदेश जितने बड़े नहीं बन सकते।

क्या आप जानते हैं? इज़राइल की कुल आबादी लगभग 74,11,500 है, और ये चारो तरफ से कट्टर इस्लामिक देशों जैसे उत्तर में लेबनान, पूर्व में सीरिया और जॉर्डन, दक्षिण में अकाबा की खाड़ी व दक्षिण-पश्चिम में मिस्र से घिरा हुआ है।

आतंकवादियों के साथ मिलकर चार बार इस्लामिक फंडामेंटिलिस्ट देशों ने अकेले इजराइल पर हमला किया था। पहली बार 1948 में, फिर 1956 में, फिर 1967 में, फिर 1973 में।

अब ज़रा इज़राइल की सैन्य और विदेशनीति भी जान लीजिये, इज़राइल कभी किसी देश पर पहले हमला नहीं करता। और किसी संघठन को यह नहीं कहता की हमारे देश में आंतकवादी घटनायें या हमला मत कीजिये। बल्कि इज़राइल कहता है अगर किसी ने हमारे देश के एक नागरिक को मारा तो हम उस देश में घुसकर कर १०० लोगों को मार देंगे। हाल ही में फिलिस्तीन ने यह गलती की तो इजराइल ने फिलिस्तीन के 5 स्कूलों पर बमबारी कर दी। अगर आप इजराइल के दुश्मन हैं तो आपको इस दुनिया में कहीं भी जिन्दा रह पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इजराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी "मोसाद" का नाम जरूर सुना होगा आपने वो आपको और आपके पूरे परिवार को हर पल-पल मरने के लिए मजबूर कर देगी और अंत में आपको और आपके परिवार को आपके के ही घर में बम से उड़ा दिया जायेगा। युद्ध में इजराइल का कोई मुकाबला ही नहीं है जैसे कि मैंने बताया एक बार चार देश एक साथ मिलकर ये कोशिश कर चुके हैं लेकिन अन्ततः उन्हें मुँह की खानी ही पड़ी और बचा- विवादित क्षेत्र भी इज़राइल ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया था। लेकिन भारत कि तरह हर बार दया करके उनकी ज़मीन उन्हें वापस कर दी। क्या कोई इस्लामिक आतंकी गुट ऐसा करेगा? नहीं वह वहाँ के लोकल अवाम को कत्ल कर उनकी संस्कृति, उनके घर को नष्ट करना चाहेगा, लेकिन इज़राइल ने कई मौके मिलने के बावजूद भी ऐसा नहीं किया।

लेकिन आज हालात यह हैं कि दुनिया भर के इस्लामी फंडामेंटलिस्ट इज़राइल को इस धरती से मिटाना चाहते हैं। अमीर अरब शेख और इस्लामिक देश इज़राइल के खिलाफ बयान पर बयान देते हैं और इज़राइल को मिटाने के लिये हर संभव कोशिश कर रहे हैं। एक बेहद घटिया और खौफनाक बयान तो ईरान के अहमेदिज़ेनाद ने यह दिया कि जिस दिन उसके पास परमाणु बम आ जायेगा वह इज़राइल को इस धरती पर से मिटा देगा!

तो आज हालात यह है कि इज़राइल के विरोध का विष इन इस्लामिस्टों ने पूरे विश्व में फैला रखा है और क्योंकि यह पैसा और संख्या दोनों में ही ज्यादा हैं इसलिये इनका जहर धीरे-धीरे समझदार लोगों को भी निगलता जा रहा है।

इसलिये आश्चर्य नहीं होना चाहिये अगर इज़राइल का सब्र अब चुक न जाये। यह याद रखना चाहिये की इज़राइल के पास उन्नत और एटामिक हथियार भी हैं और इज़राइल ने यह भी कहा है कि किसी एटमी हमले की सूरत में वह पूरे आतंकवाद पोषित देशों को समूल नष्ट कर देगा। इसलिये जिन कातिलों के मंसूबे इज़राइल को नष्ट करने के हैं उन्हें याद रखना चाहिये कि वह कोई कमज़ोर देश नहीं है जो इनके अत्याचार को सह ले। इज़राइल का तमाचा जब गाल पर पड़ता है तो गाल लाल हो जाता है और वर्षों सहलाना पड़ता है।

अब इस्लामिक आतंकवादियों के दिन लद चुके हैं। इराक तबाह हो गया, अफगानिस्तान भी, और पाकिस्तान भी तबाह हो रहा है। ईरान के दिन भी जल्द ही आने वाले हैं। जो भी देश विश्व में अशांति फैलायेगा उसे नष्ट होना ही पड़ेगा। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति का संदेश होगा।

15 अगस्त, 2013

ज़नाब ज़रा फिर से गौर फरमाइए !

आज़ हम अपनी आज़ादी की वर्षगांठ का 66वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। एक देश के रूप में हमारी बहुत सी उम्मीदें 66 साल पुरानी हैं, सपने तो शायद उससे भी ज्यादा पुराने हैं। लेकिन हमें मायूस नहीं होना है और निरंतर आगे बढ़ते रहना है।

अब कुछ देशवासी मायूसी के साथ कहते हैं कि- अब खोखले हो गए हैं जय हिन्द के हमारे नारे। अरे ज़नाब यह तस्वीर का सिर्फ एक पहलू है।

यह बात भी अपनी जगह पूरी तरह सच है कि 15 अगस्त 1947 से करीब 25 साल पहले जंगे-ए-आज़ादी के किसी सूरमा ने तब ये कहा था कि हम यह अच्छी तरह से समझ लें कि स्वराज तुरंत नहीं आ जायेगा। एक बेहतर सरकार या जनता के लिए सच्ची खुशी पाने में लंबा वक्त लगेगा। उन्होंने सच्चे स्वराज की राह में 4 रुकावटों का जिक्र किया था, जो उनकी निगाह में लोगों की ज़िन्दगी को नर्क बनाने की ताकत रखती है: (1) चुनावी भ्रष्टाचार (2) अन्याय (3) धन की ताकत व निरंकुशता (4) प्रशासनिक अक्षमता।

माना कि इन चारों व्याधियों ने आज़ हमारे देश को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। बल्कि इन्होंने हमें, यानि हमारी तरह तमाम भारतीयों को अपना शिकार भी बना लिया है।

यह ठीक है कि अब भी हज़ार दुश्वारियां हैं। लेकिन मेरी समझ में नहीं आता कि आप हमेशा निगेटिव ही क्यों सोचते हैं पाजटिव सोच रखने के लिए भी हमारे पास बहुत कुछ है। अब ज़रा दूसरे पहलू पर भी तो गौर फरमाइए !

ये क्यों नहीं दिखता आपको कि आज़ादी के बाद के सफ़र में आयी चुनौतियों से हम बखूबी निपटे भी तो हैं। क्षेत्रीयता, जनसंख्या, गरीबी, राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और छद्म युद्ध लगातार देश के सामने आए। पर हमारे संविधान कि खूबी ही कुछ ऐसी है कि उसने इन सबसे पार पाने में हमारी मदद की। ये क्या कम है कि गठबंधन सरकार के दौरान भी केंद्र मज़बूत रहता है। हमले होते हैं और हम उसका जवाब भी बखूबी देते हैं। बेशक आज हमारी भारतीय मुद्रा की गिरावट विश्व अर्थव्यवस्था में हमारी दावेदारी के जोख़िम को दर्शाती है लेकिन ज़रा ये सोचिए आज़ हम ऐसे ही नहीं दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। और उम्मीद है कि 2050 तक हम चीन को पीछे छोड़ देंगे। भाई साहब आज़ हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा सड़कों का नेटवर्क भी तो है जो 19 लाख मील है वो ऐसे ही नहीं बन गया है। आप ये क्यों नहीं सोचते कि वर्तमान में हमारी फ़ौज में 13.25 लाख सैनिक हैं और हमारी फ़ौज दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी सेना है। इंडियन आर्मी के पास 80-100 सक्रिय परमाणु हथियार मौजूद है फिर भी हमें शांत रहना ज्यादा पसंद है। तमाम समस्याओं के बावजूद अच्छी बात यह है कि हमारे पास उम्मीद की कई किरणें भी हैं। हमारी न्यायपालिका तमाम खामियों के बावजूद कई तरह के बाहरी दबावों से मुक्त है। चुनाव आयोग के रूप में हमारे पास ऐसी संस्था है, जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। अपनी सरकार खुद चुनने की आज़ादी पर कोई ख़तरा नहीं है।

भाई, भारत का सभ्य नागरिक होने के नाते मैं तो कभी अपने देश को बुरा नहीं कहता और ना ही उसे कोसता हूँ। भारत को कोसने वालों से मैं यही कहूँगा कि हज़ार दुश्वारियां के बाद भी हम आगे ही हैं। आज स्वतंत्रता दिवस पर जरूरत है, ऐसी उम्मीदों को बढ़ाने की और तमाम निराशाओं को लगातार कम करने की। वाकई कुछ बात तो है हमारे अंदर जो हस्ती मिटती नहीं हमारी, बरसों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा”। यार कमियाँ हर समाज में होती हैं। भारत में भी हैं। हाँ, हमें अब भी उन बहुत सारी बुराइयों का विरोध करने के साथ-साथ उन्हें दूर करने का प्रयास भी करना है, जो सारे जहाँ से अच्छे इस देश को आगे बढ़ने से रोक रही हैं। यह जरूर है कि इस दौर में भी देश की दिशा और दशा को लेकर बहुत से लोगों की राय अलग-अलग है। फिर भी हमें निरन्तर बढ़ते रहने से कोई नहीं रोक सकता। याद रखें कि “हर आँख का हर आँसू पोछना अब भी हमारा सपना और संकल्प है। यही सबसे बड़ी चुनौती भी है”

किसी ने कहा था कि- “तेरी छांह तले, हम जैसे भी हों जीते तो हैं !”

अंत में सभी को स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ !

जय हिन्द, जय भारत !