11 जनवरी, 2012

सत्तर वर्ष के हो गए स्टीफिन हॉंकिंग

 प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफिन हॉंकिंग इस 8-जनवरी-2012 को सत्तर वर्ष के हो गए। आठ जनवरी 1942 को इंग्लैंड में जन्में हॉंकिंग निस्संदेह हमारे वक्त के सबसे चर्चित और लोकप्रिय वैज्ञानिक हैं। हॉंकिंग का 70 वर्ष का होना इस मायने में महत्वपूर्ण है कि 21 वर्ष की उम्र में उन्हें ‘एमायोट्राफिक लेटरल स्क्लेरॉसिस’ नाम के कठिन रोग ने घेर लिया था। 
इस रोग में शरीर की मांसपेशियों को क्रमशः लकवा मार जाता है। इसके निदान के बाद मरीज की उम्र गिनें-चुने वर्ष ही रह जाती है। हॉंकिंग को डॉक्टरों ने कहा था कि वह सिर्फ दो-तीन वर्ष ही जिएंगे। जबकि हॉंकिंग उसके बाद लगभग पचास वर्ष जी चुके हैं। चिकित्साशास्त्र के इतिहास में इस रोग का कोई मरीज इतनी लंबी उम्र नहीं जियाहालांकि यह रोग लगातार उन्हें ग्रसता गया। कुछ वर्ष पहले हॉंकिंग भारत आए थेतब तक उनके एक हाथ की एक छोटी उंगली गतिमान थीजिसके जरिये वह कम्प्युटर की सहायता से काम करते थे। अब उनके गाल की कुछ मांसपेशियाँ ही सक्रिय हैंउनके चश्में में एक संवेदनशील इंफ्रारेड सेंसर लगा हैजो उन मांसपेशियों की हर हरकत को एक कम्प्युटर तक पहुंचाता है। यह कम्प्युटर इस तरह व्यक्त किए गए शब्दों को सिंथेसाइज़र के द्वारा आवाज़ में ढालकर रिकॉर्ड करता है। इस प्रक्रिया से अपना एक भाषण तैयार करने के लिए उन्हें कई दिनों तक मेहनत करनी पड़ती है। 1985 में उन्हें निमोनिया हो गया था और उसके इलाज़ के दौरान उनकी आवाज़ चली गई थी। इतनी कठिन बीमारी से जूझते हुए भी वह शोधकार्य करते रहेकिताबें लिखते रहेजबकि एक-एक शब्द लिखना उनके लिए कठिन कार्य था दुनियाँ भर में भाषण देते रहे। वह पिछले दिनों कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में गणित विषय के उसी पद से रिटायर हुए हैंजिस पद पर कभी 'सर आइजैक न्यूटनहुआ करते थे। आज के कई नामी वैज्ञानिक उनके शोध छात्र रहे हैं। स्टीफन हॉंकिंग की महानता यह है कि उन्होंने अपने काम पर अपने रोग कि छाया नहीं पड़ने दीबल्कि वह कहते हैं कि बीमार होने और पहियेदार कुर्सी पर जकड़े रहने कि वजह से वह इधर-उधर के व्यवधानों से बचे रहे और अपना दिमाग विज्ञान की समस्याओं में लगाए रहे।
     हॉंकिंग को विज्ञान के क्षेत्र में तो मान्यता काफी पहले ही मिल गई थीलेकिन उन्हें व्यापक लोकप्रियता 1988 में प्रकाशित उनकी किताब ‘ए ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ से मिलीजिसकी आज तक एक करोड़ से भी ज्यादा प्रतियाँ बिक चुकी हैं। हॉंकिंग सिर्फ जाने-माने वैज्ञानिक नहीं हैंबल्कि वह उन लोगों में से हैंजो विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का काम भी करते हैं। वह कई टीवी कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए या उससे जुड़ें रहे। उनकी लोकप्रियता का राज़ उनकी दिलचस्प शैली और विज्ञान को व्यापक दार्शनिक सवालों से जोड़ना है। उनका बुनियादी काम अन्तरिक्ष विज्ञानब्लैक होल्सक्वान्टम गुरुत्वाकर्षण वगैरह से जुड़ा हैलेकिन वह उसे ज्यादा बड़े सवालों से जोड़ते हैं। इस काम में उनके सहयोगी 'सर रोज़र पेनरोज़भी उनकी काफी मदद करते हैं। हाकिंग को नोबेल पुरस्कार के अलावा संभवतः वे सभी पुरस्कार अब तक मिल चुके हैंजो किसी वैज्ञानिक को मिल सकते हैं। लेकिन हाकिंग का रोग भी बढ़ता जा रहा है। कई वर्षों से जो उनकी कम्प्युटरीकृत आवाज़ हैवह बदलना जरूरी हो गया हैक्योंकि उनके गालों की मांसपेशियाँ भी अब कमजोर पड़ने लगी हैं। अक्सर यह होता है कि एक-एक शब्द कहने में उन्हें पूरा एक मिनट लग जाता है। उनके हितचिंतक उनके लिए बेहतर से बेहतर कम्प्युटर प्रोग्राम बनाने में लगे रहते हैं और हमें कामना करनी चाहिए कि इस महान वैज्ञानिक की आवाज़ हमें लंबे समय तक सुनाई देती रहें।
साभार- 'हिंदुस्तान'