23 अक्तूबर, 2012

यह ‘Rice Puller' आखिर है क्या?

शहर फैज़ाबाद में विगत 21/22 सितम्बर की रात में चोरी हो गयी प्रसिद्ध बड़ी 'देवकाली मंदिर' की मूर्ति 22 सितम्बर को कानपुर से बरामद की गयी। इस मंदिर की मूर्ति 40 लाख में बिकने वाली थी। इस बरामदगी के बीच एक दिलचस्प बात जो पता चली वो मेरे और शायद आपके लिए भी गौर फरमाने वाली है। इसके लिए हज़ारों संदिग्ध मोबाइल नम्बर के मैसेज एस॰एस॰पी- रमित शर्मा सेंसर कराते रहे। इसी में एक मैसेज वह भी था जिसमें ‘RP Done’ का उल्लेख था। RP यानि ‘Rice Puller’
‘RP’ आपके लिए तो नया नाम है, पर मूर्ति तस्करों के लिए नया नहीं है। RP यानि राइस-पुलर उसे कहते हैं जो मूर्ति चावल को अपनी तरफ खींच लेती है। है न दिलचस्प? अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी कीमत 70 हज़ार रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। यही वज़ह है कि मंदिरों से पुरानी मूर्तियों को चुराए जाने का सिलसिला तेज़ हो गया है।
चर्चा यह भी है कि जो मूर्ति ज्यादा पूजित होती है वह ज्यादा चावल खींचती है। इसलिए महत्वपूर्ण मंदिरों की प्राचीन RP मूर्तियां, मूर्ति चोरों के निशाने पर हैं। क्योंकि इसमें मोटा मुनाफा जो ठहरा। अब इस विडियो को देखकर 'राइस पुलर' मूर्ति को समझा जा सकता है।

17 जून, 2012

ईश्वर का स्वरुप

इस दुनिया में ९९% लोग आस्तिक है, जिनका ईश्वर पर विश्वास है कि वही दुनिया को संचालित करता है। मैंने एक दिन अपने मित्र से पूछा की तुम्हें क्यों लगता है की ईश्वर जैसी कोई चीज है जो सारी दुनिया को संचालित करती है उसने मुझसे थोड़ा क्रोधित होते हुए पूछा की यदि ईश्वर नहीं है तो सोचो ये दुनिया कहाँ से आयी? हम लोग, ये पूरा ब्रह्माण्ड कहाँ से उत्पन्न हो गया?

12 अप्रैल, 2012

आओकीगारा - सुसाइड फॉरेस्ट

जापान में आओकीगारा एक ऐसा जंगल जैसा आपने सिर्फ फिल्मों या किसी टीवी सीरियल में ही देखा होगा। जिसमें आदमी एक बार चला तो जाता है लेकिन फिर जिंदा लौट कर नहीं आता। आओकीगारा नाम है उसी जैसे जंगल का जिसे आज सुसाइड फॉरेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।

03 मार्च, 2012

मैमथ

जानकारों के अनुसार पृथ्वी पर लगभग 4-5 हजार वर्ष पूर्व हाथी जैसा दिखने वाला लेकिन उससे भी कहीं ज़्यादा विशाल एक जानवर रहता था। उसके दाँत बहुत अधिक बड़े और घुमावदार होते थे और शरीर पर ऊन की तरह लंबे-लंबे बाल होते थे। आम और प्रचलित भाषा में इस जानवर को मैमथ कहा जाता है।

12 जनवरी, 2012

जब हार गया था सत्य

Galileo
मुझे बहुत गुस्सा आता है, जब मैं यह पढ़ता हूँ कि किस तरह चंद क्रूर ईसाई धर्मांधों ने गैलीलियो को ज़िंदा जला दिया था। गैलीलियो का गुनाह बस इतना था। कि उन्होने एक सच बात बोली थी। उन्होने कहा था कि सूर्य पृथ्वी के चक्कर नहीं लगाता, बल्कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। जबकि धर्मग्रंथ में लिखा था कि पृथ्वी केंद्र में है और सूर्य तथा अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। गैलीलियो ने जो बोला, वह सच था। धर्मग्रंथ में झूठ लिखा था, इसलिए धर्मग्रंथ को सच मानने वाले सभी अंधे, गैलीलियो के विरुद्ध हो गए। गैलीलियो को पकड़कर मुक़द्दमा चलाया गया। अदालत भीड़ से डर गई। भीड़ ने कहा यह हमारे धर्म के खिलाफ बोलता है, इसे ज़िंदा जला दो। अदालत ने फैसला दिया, इसे ज़िंदा जला दो, क्योंकि इसने लोगों की धार्मिक आस्था के खिलाफ बोला है। सत्य हार गया, आस्था जीत गई।

साभार-हिंदुस्तान

11 जनवरी, 2012

सत्तर वर्ष के हो गए स्टीफिन हॉंकिंग

 प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफिन हॉंकिंग इस 8-जनवरी-2012 को सत्तर वर्ष के हो गए। आठ जनवरी 1942 को इंग्लैंड में जन्में हॉंकिंग निस्संदेह हमारे वक्त के सबसे चर्चित और लोकप्रिय वैज्ञानिक हैं। हॉंकिंग का 70 वर्ष का होना इस मायने में महत्वपूर्ण है कि 21 वर्ष की उम्र में उन्हें ‘एमायोट्राफिक लेटरल स्क्लेरॉसिस’ नाम के कठिन रोग ने घेर लिया था।