27 अक्तूबर, 2011

टैली - एक अलग नज़रिया

टैली को तो जानते ही होंगे आप? जी हाँ मैं उसी मशहूर एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के बारे में बात कर रहा हूँ जिसने आज छोटे-बड़े सभी व्यापारियों को अपने बहीखातों व मोटे-मोटे लेजरबुकों को लैपटॉप और डेस्कटॉप में बदलने के लिए मजबूर कर दिया हैं।
और वही व्यापारी अपने लैपटॉप और डेस्कटॉप की रोज़ सबेरे पूजा-अर्चना करते देखे जाते हैं। आज दीपावली पर्व में कुछ जगहों पर कलम-पूजा का भी रिवाज़ है और दीपावली के दूसरे दिन यानि परेवा में कोई भी व्यापारी अपनी कलम का प्रयोग नहीं करता हैं। मेरा कहने का ये मतलब है कि अब उसी ‘कलम-पूजा’ की जगह लैपटॉप पूजा बिलकुल उसी तरह होने लगी है। इन सब की वजह है टैली सॉफ्टवेयर, लेकिन क्या आप ये जानते हैं? कि टैली को बनाया किसने है?
भरत गोयनका
टैली का उपयोग करने वाले शायद बहुत कम लोग ये जानते होंगे, कि जिस सॉफ्टवेयर पर वो रोज़ सुबह से लेकर शाम तक काम करते हैं उसे भरत गोयनका जी ने बड़ी लगन और मेहनत से तैयार करके एकाउंटिंग को बेहद सरल बनाया आम लोगों के लिए। टैली परिणाम है उस अलग नज़रिये का जिसने आज एकाउंटिंग की तस्वीर बदल दी है। भरत गोयनका जी मैथमैटिक्स से स्नातक हैं इनके पिता श्याम सुंदर गोयनका एक उद्यमी थे। उनकी रोज़ की एकाउंटिंग की समस्या को देखते हुए इन्होंने टैली नाम का एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सबसे पहले 1984 में विकसित किया था। फिर पिता के सहयोग से प्यूट्रानिक्स नाम की कंपनी शुरू की। 1988 में प्यूट्रानिक का नाम टैली रखा गया। आज 700 लोग काम करते हैं टैली सल्यूशन्स में और 3700 रिटेलरों के जरिये बिकते हैं टैली के उत्पाद। और हाल ही में इन्होंने टैली का एडवांस नौवाँ वर्जन भी बाज़ार में उतार दिया है। यह कई भाषाओं में उपलब्ध है। टैली आज अपनी खूबियों की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है।