29 मई, 2011

मनुष्य बन जाएगा मशीन

हम अपने निकट अतीत पर नज़र डालें, तो पाते हैं कि तकरीबन 8,000 वर्ष पहले मानवता ने कृषि क्रांति का दीदार किया था और करीब 150 वर्ष पहले औद्योगिक क्रांति का। भले ही इन दोनों के बीच एक लंबा अंतराल रहा हो, लेकिन अगले 90 वर्षो में प्रोद्योगिकीय विकास की गति तीव्र से तीव्रतर होती गई। इसकी एक झलक हमें कम्प्युटर के विकास क्रम से भी मिलती है, जिसका आरंभिक स्वरूप (1900-1920) जहां मात्र 'संगणको' का था, वह अब आधुनिक सुपर कम्प्युटर तक आ पहुंचा है।
आज का कम्प्युटर अपनी गणनात्मक क्षमता में चूहे के दिमाग को मात करने की कृत्रिम बुद्धि की सीमा छू रहा है और ऐसा अनुमान है की वर्ष 2020 तक यह मनुष्य के मस्तिष्क की बराबरी कर लेगा और 2020-23 तक तो मनुष्य को भी पछाड़ देगा। अनुमान है कि वर्ष 2045 के आते-आते यह समूची पृथ्वी के समस्त मानवों की सम्मिलित मानसिक क्षमताओं की बराबरी कर बैठेगा। मतलब आदमी तब कम्प्युटर के आगे बौना हो उठेगा। यही नहीं, तब की दुनिया में होने वाले बदलावों के अनुमान लगाए जा रहे हैं। एक विचार यह है कि तब मनुष्य और (कम्प्युटर) मशीन का मिलन हो जाएगा और धरती पर 'साईबोर्गों' का साम्राज्य हो जाएगा। साईबोर्ग का मतलब है मशीनी मानव या फिर मानवीय मशीनें। दुनिया के सबसे पहले साइबोर्ग मानव प्रोफेसर 'केविन वारविक'  हैं। मनुष्य और मानव का 'फ्यूजन'। साइबोर्गों की दुनिया में मनुष्य महज़ एक 'सॉफ्टवेयर' बन कर रह जाएगा। एक आशंका यह भी है - कहीं कृत्रिम बुद्धि से लैस मशीनें मनुष्य का वजूद ही न मिटा दें !
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Human-Hybrid Robot