21 मई, 2011

एक सपना जो शायद सच हो

अभी कुछ देर पहले सो कर उठा हूँ, ब्रश करने के बाद चाय पी रहा था तभी याद आया कि मैं तो कोई सपना देख कर उठा हूँ। याद करने लगा की क्या देखा था? सारे बिखरे हुए चलचित्रों की मानिंद घटनाओँ की तस्वीरों को जोड़ता हुआ यहाँ आ गया जल्दी से कुछ लिखने ताकि भूल न जाऊँ।
मैँने देखा कि मैं इस धरती से दूर कहीं और हूँ, शायद दूसरे ग्रह पर, देखता हूँ वहाँ एक बिल्डिँग है बिल्कुल अपने शहर के किसी सरकारी ऑफिस की तरह, उसकी बाहरी दीवारेँ ब्राउन कलर मेँ कुछ खुरदरी सी हैँ (बड़ी रोचक बात है कि मैँ ज्यादातर सपने कलर देखता हूँ, सभी के साथ ऐसा नहीँ होता है) और उस बिल्डिँग में कुछ कंन्ट्रोल रूम जैसा दृश्य है जहां मॉनिटर पर बैठे एक भारतीय से दिखने वाले एक व्यक्ति से मैँने पूछा कि ये ऑफिस किसका है? तो उसने बताया की ये भारत सरकार का कन्ट्रोल रुम है जो 24 घन्टे पृथ्वी पर भारतीय स्पेस कन्ट्रोल रूम से जुड़ा रहता है शायद इसरो से, मैँ बाहर निकल आता हूँ तब मुझे मालूम पड़ता है कि यहां इस ग्रह के कुछ इलाकों पर भारत सरकार का अधिपत्य है, कुछ दूर चलने पर देखता हूं कि कुछ गुमटियाँ खुली है जैसी अपने यहाँ चाय-पान की होती है, पास जाने पर देखा की एक गुमटी जैसी दुकान पर एक चचा से दिखने वाले शख्स बैठे हैं, उनसे मैंने पूछा की यहाँ कैसे? तो उन्होने तपाक से जवाब दिया की उधर से इधर आ गया हूँ। मुझे वो कुछ जान-पहचान के लग रहे थे, जैसे उन्हें कहीं देखा है... तभी मेरी नींद टूट जाती है और मैं देखता हूँ की मैं तो अपने बिस्तर पर हूँ। जाने यह सपना था या कल की हक़ीक़त?