09 मार्च, 2011

सत्यापन, अपने ही कैरेक्टर का

वाह! खूब है सरकारी तंत्र और उसकी कार्यप्रणालियाँ।
अब आप सोचेंगे कि मैं आज इतनी तारीफ़ों के पुल क्यों बांधे जा रहा हूँ। अब मुझे नहीँ मालूम की यहाँ की कार्यप्रणाली की तरह पूरे देश की कार्यप्रणाली है या सिर्फ 'उत्तम प्रदेश' में ही ऐसा होता है?
अब आप पूछेंगे कि हुआ क्या है?
यार हुआ कुछ नहीँ बस इस सरकारी तंत्र की तारीफ में कसीदे करने का मन हुआ।
अब आप पूछेंगे कि ऊपर लिखा 'सत्यापन' का क्या चक्कर है? जी हाँ वही तो मैँ कहना चाहता हूँ कि आज के हाईटेक युग मेँ हमारी सरकार की यह कार्यप्रणालियाँ मेरे जैसे भारतवासियों को तो एकदम समझ मेँ नहीँ आती।
अब आप ही बताओ? मुझे एक कार्य के सिलसिले में शहर के जिलाधिकारी से सत्यापित चरित्र प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ गयी अब उसे बनवाने में मुझे जो दिन में तारें दिखलायी पड़ने लगे